हर शाम में एक शाम ( शायरी )
चाहत बहुत सी थी ज़िंदगी में. पर जोह खाश चाहत थी उसे न पा सके हम, अपनी मोहोब्बत को खुद में समेटे
हुए देकर खुद को उसका नाम खुद से बाते करते रहे हम , हर शाम की निंदो में सपना बनकर आती थी तुम
ज़िंदगी से बेहतर सपनो को बना जाती थी तुम |
दोस्तों ज़िंदगी में किसी को पाने की चाहत सबसे खास होती है अगर वह मिल जाये तो ज़िंदगी मुकम्बल कर जाए
और न मिले तोह ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास दिला जाती है मेरी कुछ लाइन है जिसे मैं उम्म्मीद करता
हु आपको अपने किसी खास की याद दिलाए .
हर शाम में , एक शाम ऐसी भी आए
सिवा तुझे मेरे , कुछ भी नजर न आए
बहो में मेरे तेरा हाथ हो वक़्त भी थहेम जाए
चाहत है की तुम कहो , ज़िंदगी हमारी बस यु ही गुजर जाए
मनन्तो को खुदा मेरी कुबूल फरमाए
हर जन्म में मोहौबत तेरी मुझे नसीब हो जाए
स्कूल में मुझे जन्नत मिली है
अय खुदा
इस जनम भी उसकी नजरे मुझसे
मिली है
हर शाम में एक शाम ( शायरी )....

